पेशाब करने के बाद फिर से बूंद-बूंद टपकना: किस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं और क्या है इलाज?
कई लोगों को पेशाब करने के बाद यह समस्या होती है कि उन्हें लगता है पेशाब पूरी तरह खत्म हो गया है, लेकिन कपड़े पहनने या कुछ कदम चलने के बाद फिर से पेशाब की कुछ बूंदें निकल जाती हैं। यह स्थिति शर्मिंदगी और परेशानी का कारण बन सकती है। कुछ लोग इसे सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह पेशाब की नली, मूत्राशय, पेल्विक फ्लोर या पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है।
हालांकि, हर बार पेशाब के बाद बूंद-बूंद टपकना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। कई पुरुषों में यह पोस्ट-मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग नामक स्थिति के कारण हो सकता है, जिसमें पेशाब करने के बाद मूत्रमार्ग में थोड़ी मात्रा में पेशाब रह जाता है और बाद में बाहर निकलता है। दूसरी ओर, अगर इसके साथ पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में जलन, खून आना, पेट में दर्द या मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि पेशाब के बाद बूंद-बूंद टपकने के क्या कारण हो सकते हैं, किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इसका इलाज किस प्रकार किया जाता है।
पेशाब करने के बाद बूंद-बूंद टपकना क्या है?
इस समस्या में व्यक्ति पेशाब करने के बाद खुद को खाली महसूस करता है, लेकिन कुछ सेकंड या मिनट बाद मूत्र की कुछ बूंदें फिर से निकल सकती हैं। कई बार यह अंडरवियर या कपड़ों को गीला कर देती है।
पुरुषों में इसे अक्सर Post-Micturition Dribble (PMD) कहा जाता है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि पेशाब करने के बाद मूत्रमार्ग का कुछ हिस्सा पूरी तरह खाली नहीं हो पाता और उसमें बचा हुआ मूत्र बाद में शरीर की हरकत या गुरुत्वाकर्षण के कारण बाहर आ जाता है।
लेकिन केवल बूंद-बूंद टपकने के आधार पर बीमारी का नाम तय नहीं किया जा सकता। सही कारण जानने के लिए व्यक्ति के दूसरे लक्षण, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर जांच महत्वपूर्ण होती है।
1. पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी
पेशाब के नियंत्रण में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुरुषों में पेशाब करने के बाद मूत्रमार्ग में बची कुछ बूंदों को बाहर निकालने में भी इन मांसपेशियों की भूमिका होती है।
यदि ये मांसपेशियां कमजोर हो जाएं तो पेशाब पूरी तरह खत्म होने के बाद भी कुछ मूत्र मूत्रमार्ग में रह सकता है। बाद में खड़े होने, चलने या कपड़े पहनने पर यह बाहर निकल सकता है।
पेल्विक फ्लोर की कमजोरी कई कारणों से हो सकती है, जैसे:
बढ़ती उम्र
लंबे समय तक कब्ज रहना और जोर लगाना
अधिक वजन
लगातार पुरानी खांसी
भारी वजन उठाने की आदत
कुछ प्रकार की सर्जरी
नसों से जुड़ी समस्याएं
ऐसे मामलों में डॉक्टर या प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज मददगार हो सकती हैं।
2. पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट
उम्र बढ़ने के साथ कुछ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बड़ी हो सकती है। इसे सामान्य रूप से Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) कहा जाता है।
प्रोस्टेट पेशाब की नली के आसपास स्थित होता है। जब यह अधिक बढ़ जाता है तो पेशाब के प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकता है।
प्रोस्टेट बढ़ने पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
पेशाब शुरू करने में परेशानी
पेशाब की धार कमजोर होना
पेशाब रुक-रुककर आना
पेशाब पूरा न निकलने जैसा महसूस होना
बार-बार पेशाब आना
रात में कई बार पेशाब के लिए उठना
पेशाब के अंत में बूंद-बूंद आना
अगर बूंद-बूंद पेशाब आने के साथ धार कमजोर है या पेशाब शुरू करने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
प्रोस्टेट की समस्या का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट कई बार गैर-कैंसरकारी स्थिति हो सकती है, लेकिन सही कारण की जांच जरूरी है।
3. मूत्राशय पूरी तरह खाली न होना
कुछ लोगों में मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। इसे मूत्र रुकने या incomplete bladder emptying जैसी स्थिति से जोड़ा जा सकता है।
जब मूत्राशय में पेशाब बचा रह जाता है तो व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब निकलने या लगातार बूंद-बूंद टपकने जैसी समस्या हो सकती है।
इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:
पेशाब के रास्ते में रुकावट
बढ़ा हुआ प्रोस्टेट
मूत्रमार्ग का संकरा होना
मूत्राशय की मांसपेशियों का ठीक से काम न करना
नसों से संबंधित कुछ समस्याएं
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां जैसे डायबिटीज
अगर व्यक्ति को ऐसा लगता है कि पेशाब करने के बाद भी मूत्राशय खाली नहीं हुआ है, तो इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
4. पेशाब की नली में संकुचन
पेशाब शरीर से मूत्रमार्ग यानी यूरेथ्रा के जरिए बाहर निकलता है। कुछ स्थितियों में यह नली संकरी हो सकती है। इसे urethral stricture कहा जाता है।
नली संकरी होने पर पेशाब के प्रवाह में रुकावट हो सकती है।
इसके संभावित लक्षण हैं:
कमजोर धार
पेशाब शुरू करने में कठिनाई
पेशाब रुक-रुककर आना
पेशाब करने में जोर लगाना
पेशाब पूरा न निकलने का एहसास
अंत में बूंद-बूंद टपकना
इस समस्या की पहचान के लिए डॉक्टर कुछ जांच कर सकते हैं। इलाज कारण और समस्या की गंभीरता के अनुसार अलग हो सकता है।
5. यूरिन इन्फेक्शन भी हो सकता है कारण
पेशाब की नली या मूत्राशय में संक्रमण होने पर पेशाब से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी UTI में ये लक्षण हो सकते हैं:
पेशाब में जलन
बार-बार पेशाब लगना
अचानक तेज पेशाब की इच्छा होना
थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब आना
पेशाब में बदबू
पेशाब का रंग असामान्य दिखना
निचले पेट में परेशानी
हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
अगर पेशाब में जलन, बुखार, ठंड लगना या दर्द भी हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। बिना जांच के एंटीबायोटिक दवा शुरू करना सही नहीं है।
6. ओवरफ्लो इनकॉन्टिनेंस
कुछ लोगों में मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता और उसमें लगातार पेशाब जमा होता रहता है। जब मूत्राशय बहुत भर जाता है तो पेशाब थोड़ी-थोड़ी मात्रा में टपक सकता है।
इसे overflow incontinence कहा जा सकता है।
इस स्थिति में व्यक्ति को ये समस्याएं महसूस हो सकती हैं:
बार-बार बूंद-बूंद पेशाब टपकना
पेशाब की कमजोर धार
मूत्राशय खाली न होने जैसा महसूस होना
पेशाब शुरू करने में परेशानी
बार-बार पेशाब लगना
इसका कारण जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इलाज मूल कारण पर निर्भर करता है।
7. नसों से जुड़ी समस्याएं
मूत्राशय और मस्तिष्क के बीच नसों के माध्यम से संदेश जाते हैं। नसें मूत्राशय को यह नियंत्रित करने में मदद करती हैं कि कब मांसपेशियां सिकुड़ें और कब ढीली हों।
कुछ स्थितियों में नसों का कार्य प्रभावित होने पर पेशाब का नियंत्रण या मूत्राशय को पूरी तरह खाली करना प्रभावित हो सकता है।
डायबिटीज सहित कुछ neurological समस्याएं भी मूत्राशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
अगर पेशाब की समस्या के साथ पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या अन्य neurological लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
क्या केवल पुरुषों को यह समस्या होती है?
नहीं। महिलाओं को भी पेशाब का रिसाव या मूत्र नियंत्रण से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
महिलाओं में कुछ स्थितियों में पेल्विक फ्लोर की कमजोरी, गर्भावस्था, प्रसव, बढ़ती उम्र और menopause के बाद होने वाले बदलाव पेशाब के रिसाव से जुड़े हो सकते हैं।
यदि किसी महिला को पेशाब के बाद बूंदें निकलती हैं या खांसने, हंसने और वजन उठाने पर पेशाब निकल जाता है तो डॉक्टर से जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
पेशाब करने के बाद बूंद-बूंद आने पर क्या करें?
सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है। अगर कभी-कभार कुछ बूंदें आती हैं और कोई दूसरा लक्षण नहीं है, तो यह कई बार मूत्रमार्ग में बची थोड़ी मात्रा के कारण हो सकता है।
पुरुषों में पेशाब करने के बाद कुछ सेकंड रुकना उपयोगी हो सकता है ताकि मूत्राशय और मूत्रमार्ग से बचा हुआ पेशाब निकल सके।
कुछ लोगों में पेशाब खत्म होने के बाद हल्के से इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर दोबारा पेशाब की कोशिश करने से मूत्राशय अधिक पूरी तरह खाली हो सकता है। इसे कभी-कभी double voiding approach कहा जाता है।
लेकिन जोर लगाकर बार-बार पेशाब निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज क्या हैं?
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज को आमतौर पर Kegel exercises भी कहा जाता है।
इनका उद्देश्य पेशाब को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को मजबूत करना है।
इन एक्सरसाइज को सही तरीके से करना महत्वपूर्ण है। गलत मांसपेशियों को बार-बार सिकोड़ने से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता।
सामान्य रूप से:
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की पहचान करें।
उन्हें कुछ समय के लिए हल्के से सिकोड़ें।
फिर मांसपेशियों को आराम दें।
इसे नियमित रूप से डॉक्टर या प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पेशाब करते समय नियमित रूप से बीच में पेशाब रोककर Kegel exercise करने की आदत नहीं बनानी चाहिए। सही तकनीक सीखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ या pelvic floor physiotherapist की मदद ली जा सकती है।
नियमित अभ्यास के बाद परिणाम आने में समय लग सकता है।
स्रोत (Source): यह आर्टिकल ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) और WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की सामान्य गाइडलाइंस पर आधारित है।
पानी कम पीना क्या सही उपाय है?
नहीं, केवल बूंद-बूंद पेशाब की समस्या के कारण पानी बहुत कम कर देना सही नहीं है।
पानी की जरूरत व्यक्ति के मौसम, काम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
कुछ लोगों में अत्यधिक कैफीन वाले पेय, जैसे बहुत ज्यादा चाय या कॉफी, मूत्राशय की कुछ समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लेकिन हर व्यक्ति को पानी की मात्रा अपने आप बहुत कम नहीं करनी चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को हृदय या किडनी की बीमारी के कारण डॉक्टर ने fluid restriction दी है, तो उसी सलाह का पालन करना चाहिए।
कब्ज का भी रखें ध्यान
कब्ज और पेशाब की कुछ समस्याओं के बीच संबंध हो सकता है। लंबे समय तक कब्ज रहने पर पेल्विक क्षेत्र पर असर पड़ सकता है और कुछ लोगों में मूत्राशय से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।
इसलिए:
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